ANCIENT HISTORY

ANCIENT HISTORY OF INDIA 

प्राचीन भारत का इतिहास 

• ANCIENT HISTORY (इतिहास)

भारत का इतिहास

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1. पाषाण काल समय की शुरुआत लगभग 2.6 मिलियन वर्ष पहले हुई थी।

2. इस समय के लोग प्राचीन शिलालेखों पर अपने जीवनकाल और कार्यों की चिह्नित कुंजी बनाते थे।

3. पाषाण काल के लोग धार्मिक धरोहर और धार्मिक विधियों के पालन करते थे।

4. उन्होंने बृहद बज्र, नुपुर, चिकनी चाकू आदि के उपकरण बनाए थे।

5. जल्दीय मानव समुदाय शिकार करते थे और एकत्रित भोजन खाते थे।

6. पाषाण काल के लोगों की आवास गुफाओं में थीं जिन्हें वे खुद निर्माण करते थे।

7. इस समय के लोग रंगीन चित्रकारी और शिल्प कार्य में निपुण थे।

8. बृहदीश्वर में खुदाई से मिले प्राचीन शिलालेखों ने पाषाण काल की भूमिका का पता लगाने में मदद की।

9. इस समय के लोगों की विशाल नगरीय समृद्धि थी और वे व्यापार भी करते थे।

10. पाषाण काल का अंत लगभग 2000 ईसा पूर्व हो गया और उसके बाद अन्य युगों का आरंभ हुआ।

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Ancient history of India (इसे भी पढ़ें)-

• यूनानी यों ने भारत को इंडिया तथा मध्यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने हिंद

थवा हिंदुस्तान के नाम से संबोधित किया है।

• भारतीय इतिहास को अध्ययन की सुविधा के लिए तीन भागों में बांटा गया है –

1. प्राचीन भारत

2. मध्यकालीन भारत

3. आधुनिक भारत

1• प्राचीन भारत

1) भारत का सर्व प्राचीन धर्म ग्रंथ वेद है जिसके संकलनकर्ता महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास को माना जाता है वेद चार है ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद एवं अथर्ववेद।

2) श्रचायो के क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्वेद कहा जाता है।

3) ऋग्वेद में 10 मंडल 1028 सूक्त एवं 10462 श्रचाये हैं।

4) ऋग्वेद को पढ़ने वाले रिसीव को होत्री कहते हैं।

5) विश्वामित्र द्वारा रचित ऋग्वेद के तीसरे मंडल में सूर्य देवता सावित्री को समर्पित प्रसिद्ध गायत्री मंत्र है एवं इसके नौवें मंडल में सोम देवता का उल्लेख है।

6) यजुर्वेद गद्य और पद्य दोनों में हैं।

7) सामवेद को भारतीय संगीत का जनक कहा जाता है।

8) अथर्व वेद के रचयिता अथर्व ऋषि को माना जाता है।

9) रोग निवारण तंत्र मंत्र जादू टोना टोटका आज का ग्रंथ अथर्व को माना जाता है।

10) सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद एवं सबसे बाद का वेद अथर्ववेद को माना जाता है।

पुराण संबंधित वंश

विष्णु पुराण मौर्य वंश

मत्स्य पुराण सातवाहन वंश

वायु पुराण

गुप्त वंश

 वेदों को भली भाषण देने के लिए 6 वेदांगो की रचना हुई है शिक्षा ज्योतिष कल्प व्याकरण निरुक्त तथा छंद।

 पुराण के रचयिता लोमहर्षक वाइन के पुत्र उमराव को माना जाता है और पुराणों की संख्या 18 है जिनमें केवल 5 मत्स्य , वायु, विष्णु ,ब्राह्मण एवं भागवत में ही राजाओं की वंशावली पाई जाती है।

 पुराणों मत्स्य पुराण सबसे प्राचीन एवं प्रमाणिक है।

 स्मृति ग्रंथो में सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक मनुस्मृति मानी जाती है यह शुंग काल का मानक ग्रंथ है।

 बुद्ध की पुनर्जन्म की कहानी जातक में वर्णित है।

 हीनयान का प्रमुख ग्रंथ कथावस्तु है जिसमें महात्मा बुद्ध का जीवन चरित्र वर्णित है।

 जैन धर्म प्रारंभिक इतिहास कल्पसूत्र से ज्ञात होता है।

 अर्थशास्त्र के रचयिता चाणक्य कौटिल्य हैं इससे मौर्य कालीन इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है।

 राज तरंगिणी के लेखक कल्हण हैं जिन्होंने कश्मीर के इतिहास को लिखा है और यह संस्कृत भाषा में है।

 अष्टाध्याई के लेखक पाडिन है इसमें मौर्य के पहले का इतिहास तथा मौर्ययुगीन राजनीतिक अवस्था की जानकारी प्राप्त होती है।

 इतिहास का पिता हेरोडोटस को कहा जाता है।

 मेगास्थनीज सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था जो चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था इसने अपने पुस्तिका इंडिका में मौर्य

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